
किसी भी कायस्थ बुज़ुर्ग से पूछिए कि परिवार कहाँ से आता है, तो जवाब अक्सर एक नाम से शुरू होता है — श्रीवास्तव, सक्सेना, माथुर, भटनागर… ये सिर्फ़ उपनाम नहीं हैं। कायस्थ परंपरा में हर नाम एक वंश है, जो भगवान श्री चित्रगुप्त जी के 12 पुत्रों में से किसी एक से चला।
चित्रगुप्त जी की दो पत्नियाँ
- नंदिनी — श्राद्धदेव (वैवस्वत) मनु की पुत्री, जो सूर्य देव के पुत्र थे। इनसे चार पुत्र हुए।
- शोभावती (जिन्हें इरावती भी कहते हैं) — ऋषि सुशर्मा की पुत्री। इनसे आठ पुत्र हुए।
लोक-परंपरा के अनुसार बारहों पुत्रों का विवाह नागराज वासुकी की बारह पुत्रियों से हुआ था। इसीलिए कई कायस्थ परिवार नाग पंचमी पर नाग देवता का विशेष सम्मान करते हैं।
12 पुत्र और 12 उपजातियाँ
| # | पुत्र | उपजाति (वंश) | माता |
|---|---|---|---|
| 1 | भानु | श्रीवास्तव | नंदिनी |
| 2 | विभानु | सूर्यध्वज | नंदिनी |
| 3 | विश्वभानु | निगम | नंदिनी |
| 4 | वीर्यभानु (वीर्यवान) | कुलश्रेष्ठ | नंदिनी |
| 5 | चारु | माथुर | शोभावती |
| 6 | सुचारु | गौड़ | शोभावती |
| 7 | चित्र (चित्राक्ष) | भटनागर | शोभावती |
| 8 | मतिमान (मतिभान) | सक्सेना | शोभावती |
| 9 | हिमवान | अम्बष्ठ | शोभावती |
| 10 | चित्रचारु | कर्ण | शोभावती |
| 11 | चारुण (चित्रचरण) | अस्थाना | शोभावती |
| 12 | अतीन्द्रिय (जितेन्द्रिय) | वाल्मीक | शोभावती |
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हर वंश की पहचान
- श्रीवास्तव — परंपरा से श्रावस्ती से जुड़े; आज पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में सबसे बड़े समुदायों में।
- सूर्यध्वज — “सूर्य की ध्वजा वाले”, माता नंदिनी के सूर्यवंशी होने की याद।
- निगम — नाम वेदों (निगम) की याद दिलाता है।
- कुलश्रेष्ठ — शाब्दिक अर्थ “कुल में श्रेष्ठ”।
- माथुर — मथुरा से जुड़े; राजस्थान में बड़ी संख्या में।
- गौड़ — प्राचीन गौड़ प्रदेश से जुड़े।
- भटनागर — परंपरा से राजस्थान के भटनेर से जुड़े।
- सक्सेना — “सखीसेना” यानी सेना के मित्र; परंपरा से प्राचीन संकाश्य से जुड़े।
- अम्बष्ठ — बिहार और झारखंड में।
- कर्ण — मिथिला के मैथिल कर्ण कायस्थ।
- अस्थाना — अस्थाना / अष्ठाना।
- वाल्मीक — सबसे छोटे वंशों में।
सूचियाँ कहीं-कहीं अलग क्यों होती हैं?
अगर आपके परिवार में किसी पुत्र या माता का नाम थोड़ा अलग याद है, तो आप गलत नहीं हैं। अलग-अलग ग्रंथों, क्षेत्रीय पोथियों और पारिवारिक बहियों में नाम अलग तरह से लिखे गए हैं — मतिमान को मतिभान, चारुण को चित्रचरण, शोभावती को इरावती भी कहा जाता है। ऊपर दी गई सूची कायस्थ सभाओं की किताबों और पूजा पुस्तिकाओं में सबसे ज़्यादा छपी है। हर परिवार की अपनी परंपरा सम्मान के योग्य है।
अपनी उपजाति कैसे पता करें?
ज़्यादातर परिवारों में उपजाति ही उपनाम होती है। जहाँ ऐसा नहीं है — जैसे सिन्हा, प्रसाद, लाल या सहाय लिखने वाले परिवार — वहाँ घर के बड़ों से पूछें, पुराने शादी के कार्ड देखें (उन पर अक्सर उपजाति छपी होती है) या पुरोहित के रिकॉर्ड देखें। फिर इसे अगली पीढ़ी के लिए लिखकर रखें।
कायस्थ सेतु ऐप में आप अपनी उपजाति प्रोफ़ाइल में जोड़ सकते हैं, उसी उपजाति के परिवार ढूँढ सकते हैं और फैमिली ट्री में पूरी वंशावली — भगवान चित्रगुप्त जी से शुरू करके — सहेज सकते हैं।
Frequently asked questions
चित्रगुप्त जी के कितने पुत्र थे?
बारह — चार पुत्र देवी नंदिनी से और आठ पुत्र देवी शोभावती (इरावती) से। हर पुत्र से एक कायस्थ उपजाति चली।
श्रीवास्तव किस पुत्र के वंशज हैं?
कायस्थ परंपरा के अनुसार श्रीवास्तव वंश भगवान चित्रगुप्त और देवी नंदिनी के पुत्र भानु से चला।
सक्सेना किस पुत्र के वंशज हैं?
सक्सेना वंश चित्रगुप्त जी और देवी शोभावती के पुत्र मतिमान (मतिभान) से माना जाता है।
क्या अलग-अलग उपजातियों में विवाह होता है?
हाँ। पहले विवाह प्रायः अपनी ही उपजाति में होते थे, पर आज बारहों चित्रगुप्तवंशी उपजातियों के बीच विवाह आम और स्वीकार्य हैं।
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