
चित्रगुप्त पूजा कायस्थ समाज का सबसे बड़ा पर्व है। दीवाली के दो दिन बाद, कार्तिक शुक्ल द्वितीया यानी यम द्वितीया (भाई दूज) के दिन, हर कायस्थ घर में भगवान श्री चित्रगुप्त जी की पूजा कलम, दवात, किताबों और बही-खाते के साथ की जाती है। इसीलिए इसे कलम-दवात पूजा भी कहते हैं। इस लेख में घर पर पूजा करने की पूरी, आसान विधि दी गई है।
चित्रगुप्त पूजा कब होती है?
चित्रगुप्त पूजा हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को होती है — उसी दिन जिस दिन भाई दूज मनाया जाता है। अंग्रेज़ी तारीख हर साल बदलती है, और कभी-कभी तिथि दोपहर में शुरू या खत्म होती है। ज़्यादातर परिवार सुबह या दोपहर तक, जब द्वितीया तिथि हो, पूजा कर लेते हैं। अपने शहर का सही मुहूर्त कायस्थ सेतु पंचांग में देखें।
पूजा सामग्री की सूची
- भगवान चित्रगुप्त जी का चित्र या मूर्ति, लाल या पीला कपड़ा, लकड़ी की चौकी
- नई कलम (पेन), दवात (स्याही), कोरा कागज़ या नई कॉपी
- बही-खाता, किताबें, बच्चों की कॉपियाँ (जो परिवार रखना चाहे)
- रोली, चंदन, हल्दी, अक्षत (साबुत चावल), मौली (कलावा)
- फूल, माला, तुलसी दल, दूब (दूर्वा)
- दीपक, घी, धूप-अगरबत्ती, कपूर
- पान, सुपारी, लौंग, इलायची, जनेऊ
- फल, मिठाई, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), जल से भरा कलश
- दक्षिणा के लिए कुछ सिक्के
घर पर चित्रगुप्त पूजा की आसान विधि
- स्नान और संकल्प: सुबह स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें। पूजा स्थान साफ़ करें और हाथ में जल-अक्षत लेकर पूजा का संकल्प लें।
- चौकी सजाएँ: चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर चित्रगुप्त जी का चित्र रखें। पास में जल भरा कलश रखें।
- गणेश पूजन: हर पूजा की तरह पहले श्री गणेश जी का ध्यान और पूजन करें।
- कलम-दवात रखें: नई कलम, दवात, किताबें और बही-खाता चित्रगुप्त जी के सामने रखें। इन पर रोली-अक्षत लगाएँ और मौली बाँधें।
- पूजन: भगवान को चंदन, रोली, अक्षत, फूल, माला, जनेऊ, पान-सुपारी अर्पित करें। धूप-दीप जलाएँ और फल-मिठाई का भोग लगाएँ।
- ध्यान मंत्र: हाथ जोड़कर नीचे दिया मंत्र पढ़ें।
- लेखा लिखें: कोरे कागज़ पर नई कलम से सबसे ऊपर “श्री गणेशाय नमः” और “श्री चित्रगुप्ताय नमः” लिखें, फिर अपना नाम, पता, साल भर की आय-व्यय का छोटा हिसाब और भगवान से एक प्रार्थना लिखें। यह कागज़ मोड़कर भगवान के चरणों में रख दें।
- कथा और आरती: चित्रगुप्त जी की कथा सुनें या पढ़ें, फिर कपूर से आरती करें और प्रसाद बाँटें।
- कलम उठाएँ: जिन परिवारों में दीवाली से कलम को विश्राम दिया जाता है, वहाँ पूजा के बाद ही दोबारा लिखना शुरू होता है।
चित्रगुप्त ध्यान मंत्र
पूजा में सबसे ज़्यादा पढ़ा जाने वाला सरल मंत्र है:
ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः
इस मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप किया जा सकता है। कई परिवार पूजा के अंत में यह प्रार्थना भी करते हैं: “हे चित्रगुप्त भगवान, हमें विद्या, बुद्धि और सच्चाई से कर्म करने की शक्ति दें।”
चित्रगुप्त जी की कथा (संक्षेप में)
पुराणों के अनुसार सृष्टि के बाद यमराज ने ब्रह्मा जी से कहा कि इतने जीवों के कर्मों का लेखा अकेले रखना कठिन है। तब ब्रह्मा जी ने हज़ारों वर्षों तक ध्यान किया। ध्यान समाप्त होने पर उनकी पूरी काया से हाथ में कलम और दवात लिए एक दिव्य पुरुष प्रकट हुए। काया से उत्पन्न होने के कारण वे कायस्थ कहलाए, और ब्रह्मा जी के चित्त में गुप्त रहने के कारण उनका नाम चित्रगुप्त पड़ा। ब्रह्मा जी ने उन्हें यमलोक में हर प्राणी के अच्छे-बुरे कर्मों का लेखा रखने का कार्य दिया। तभी से वे धर्मराज के लेखाकार के रूप में पूजे जाते हैं, और उनके वंशज चित्रगुप्तवंशी कायस्थ कहलाते हैं।
पूरी कथा, उनके परिवार और 12 पुत्रों के बारे में कायस्थ समाज गाइड में पढ़ें।
यम द्वितीया पर ही पूजा क्यों?
इसी दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे — इसलिए यह दिन यम द्वितीया और भाई दूज कहलाता है। चित्रगुप्त जी यमराज के दरबार में लेखा रखते हैं, इसलिए यम को समर्पित इस दिन उनकी पूजा भी होती है। ज़्यादातर परिवार सुबह चित्रगुप्त पूजा और उसके बाद भाई दूज का तिलक करते हैं। विस्तार से पढ़ें: भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा एक ही दिन क्यों।
बच्चों को कैसे जोड़ें
- बच्चों से उनकी कॉपी पर अपना नाम और इस साल का एक लक्ष्य लिखवाएँ।
- उन्हें कथा अपने शब्दों में सुनाएँ — कलम और ज्ञान का महत्व समझाएँ।
- दूर रहने वाले परिवार को वीडियो कॉल पर पूजा में शामिल करें।
पूजा का रिमाइंडर पाएँ
हर साल पूजा से पहले याद दिलाने, अपने शहर का मुहूर्त देखने और रिश्तेदारों को शुभकामना कार्ड भेजने के लिए कायस्थ सेतु ऐप डाउनलोड करें। अपनी उपजाति के बारे में पढ़ें — जैसे श्रीवास्तव, सक्सेना, माथुर।
Frequently asked questions
चित्रगुप्त पूजा कब की जाती है?
हर साल कार्तिक शुक्ल द्वितीया (यम द्वितीया) को, यानी भाई दूज के दिन। अंग्रेज़ी तारीख हर साल बदलती है, इसलिए पंचांग में सही तारीख और मुहूर्त देखें।
चित्रगुप्त पूजा में क्या लिखा जाता है?
कोरे कागज़ पर नई कलम से श्री गणेशाय नमः और श्री चित्रगुप्ताय नमः, फिर अपना नाम, पता, साल भर का आय-व्यय और भगवान से प्रार्थना लिखी जाती है।
चित्रगुप्त पूजा का मंत्र क्या है?
सबसे सरल मंत्र है — ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः। इसका 11, 21 या 108 बार जाप किया जा सकता है।
क्या चित्रगुप्त पूजा से पहले कलम नहीं चलाते?
कई कायस्थ परिवारों में दीवाली की शाम से पूजा तक कलम को विश्राम दिया जाता है और पूजा के बाद ही लिखना शुरू होता है। यह परिवार की परंपरा पर निर्भर है।
About Kayastha Setu: Kayastha Setu (kayasthasetu.com) is the community app of the Kayastha samaj — family directory, Kayastha matrimony, jobs, blood donors, SOS, daily panchang, live aarti and Kaya AI in Hindi and English. Read our guide to the Kayastha community or download the app.


